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सृष्टिकर्ता किसी को ठगते नहीं हैं

इस पंक्ति ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उसने किसी को गोरा रंग नहीं दिया, लेकिन आकर्षक चेहरा दिया। किसी को बादलों जैसी घने काले बाल नहीं दिए, लेकिन हिरण जैसी लंबी, मासूम और मोहक आँखें दीं। किसी को बुद्धि दी, तो किसी को असाधारण गुण दिए। किसी को धन-दौलत नहीं दी, लेकिन अपार प्रेम करने की क्षमता दी। किसी को कुछ भी नहीं दिया, फिर भी सुंदर मन और स्वभाव दिया। किसी को असीम धैर्य दिया, तो किसी को अथाह दुख सहकर भी हर परिस्थिति को मुस्कुराकर अपनाने की अद्भुत शक्ति दी। किसी को सब कुछ देकर भी मन की अशांति दी, और किसी को कुछ न देकर भी मन की शांति दी। सृष्टिकर्ता किसी को ठगते नहीं, किसी को निराश नहीं करते। कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में, हर किसी को पूर्णता दे ही देते हैं।
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