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भारत में किसान और छोटे व्यापारी सबसे ज़्यादा दबाव में क्यों हैं?

भारत में किसान और छोटे व्यापारी इसलिए सबसे ज़्यादा दबाव में हैं क्योंकि उनकी ज़िंदगी पूरी तरह अनिश्चितताओं पर टिकी है। किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि मेहनत की कोई गारंटी नहीं होती। मौसम कब साथ देगा, फसल का दाम सही मिलेगा या नहीं—कुछ भी तय नहीं। खाद, बीज, डीज़ल और मजदूरी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन फसल का दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। कर्ज़ लेना आसान है, लेकिन चुकाना बहुत मुश्किल हो जाता है। छोटे व्यापारियों की हालत भी अलग नहीं है। उनकी दुकान या छोटा कारोबार ही पूरे परिवार की रोज़ी-रोटी होता है। बड़े कॉरपोरेट स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और जटिल टैक्स नियमों के बीच छोटे व्यापारी टिके रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं। GST, लाइसेंस, बैंक लोन—सब कुछ उनके लिए बोझ बन जाता है। किसान और छोटे व्यापारी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसान उत्पादन करता है, व्यापारी उसे बाज़ार तक पहुँचाता है। लेकिन मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा बीच के बड़े खिलाड़ियों के पास चला जाता है। फैसले ऊपर होते हैं, असर नीचे वालों पर पड़ता है। असल सवाल यह है कि विकास किसके लिए हो रहा है? अगर देश का पेट भरने वाला किसान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाला छोटा व्यापारी ही सुरक्षित नहीं है, तो वह विकास टिकाऊ नहीं कहा जा सकता। सीधे शब्दों में कहें तो किसान और छोटे व्यापारी कोई विशेष रियायत नहीं चाहते। वे सिर्फ़ उचित दाम, सरल नियम और सम्मान के साथ जीने का अवसर चाहते हैं।
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